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Atoot vishvaas : samajik yathaarth ki shaabdik vaastavikata

By: Material type: TextTextPublication details: New Delhi Shivank Prakashan 2025Description: 270pISBN:
  • 9789349908345
Subject(s): DDC classification:
  • H 303.3 SHU
Summary: जीवन की अनकही पीड़ा को यदि समग्रता से महसूस करना हो, तो उपन्यास पढ़िए, क्योंकि उपन्यास ही एक ऐसी विधा है, जो पाठक को सीधे उस घटनाक्रम से जोड़ती है, जो उसके स्मृति पटल पर किए गए अनुभव के रूप में अंकित हो जाता है। इस दुनिया में चौधरी नमित वो अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जो अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और वो भी नहीं हैं, जिन्हें बदले में वो मिलता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती है। मानवीय कल्पना को मानवीय संदर्भ में उसके अतीत के अनुभवों और वर्तमान की आवश्यकताओं को लेकर भविष्य के सपनों के साकार होने की उम्मीद के रूप में देख सकते हैं। यह उम्मीद ही जीवन में हमारी प्रगति को न केवल रेखांकित करती है, अपितु हमारे व्यवहार को भी नए आयाम प्रदान करती है।
List(s) this item appears in: New Arrivals August, 2026
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Item type Current library Call number Status Date due Barcode Item holds
Books Books Gandhi Smriti Library H 303.3 SHU (Browse shelf(Opens below)) Available 180945
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जीवन की अनकही पीड़ा को यदि समग्रता से महसूस करना हो, तो उपन्यास पढ़िए, क्योंकि उपन्यास ही एक ऐसी विधा है, जो पाठक को सीधे उस घटनाक्रम से जोड़ती है, जो उसके स्मृति पटल पर किए गए अनुभव के रूप में अंकित हो जाता है। इस दुनिया में चौधरी नमित वो अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जो अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और वो भी नहीं हैं, जिन्हें बदले में वो मिलता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती है। मानवीय कल्पना को मानवीय संदर्भ में उसके अतीत के अनुभवों और वर्तमान की आवश्यकताओं को लेकर भविष्य के सपनों के साकार होने की उम्मीद के रूप में देख सकते हैं। यह उम्मीद ही जीवन में हमारी प्रगति को न केवल रेखांकित करती है, अपितु हमारे व्यवहार को भी नए आयाम प्रदान करती है।

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