Atoot vishvaas : samajik yathaarth ki shaabdik vaastavikata
Shukla, Jaishankar
Atoot vishvaas : samajik yathaarth ki shaabdik vaastavikata - New Delhi Shivank Prakashan 2025 - 270p.
जीवन की अनकही पीड़ा को यदि समग्रता से महसूस करना हो, तो उपन्यास पढ़िए, क्योंकि उपन्यास ही एक ऐसी विधा है, जो पाठक को सीधे उस घटनाक्रम से जोड़ती है, जो उसके स्मृति पटल पर किए गए अनुभव के रूप में अंकित हो जाता है। इस दुनिया में चौधरी नमित वो अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जो अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और वो भी नहीं हैं, जिन्हें बदले में वो मिलता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती है। मानवीय कल्पना को मानवीय संदर्भ में उसके अतीत के अनुभवों और वर्तमान की आवश्यकताओं को लेकर भविष्य के सपनों के साकार होने की उम्मीद के रूप में देख सकते हैं। यह उम्मीद ही जीवन में हमारी प्रगति को न केवल रेखांकित करती है, अपितु हमारे व्यवहार को भी नए आयाम प्रदान करती है।
9789349908345
Social Structure
Sociology
H 303.3 SHU
Atoot vishvaas : samajik yathaarth ki shaabdik vaastavikata - New Delhi Shivank Prakashan 2025 - 270p.
जीवन की अनकही पीड़ा को यदि समग्रता से महसूस करना हो, तो उपन्यास पढ़िए, क्योंकि उपन्यास ही एक ऐसी विधा है, जो पाठक को सीधे उस घटनाक्रम से जोड़ती है, जो उसके स्मृति पटल पर किए गए अनुभव के रूप में अंकित हो जाता है। इस दुनिया में चौधरी नमित वो अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जो अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और वो भी नहीं हैं, जिन्हें बदले में वो मिलता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती है। मानवीय कल्पना को मानवीय संदर्भ में उसके अतीत के अनुभवों और वर्तमान की आवश्यकताओं को लेकर भविष्य के सपनों के साकार होने की उम्मीद के रूप में देख सकते हैं। यह उम्मीद ही जीवन में हमारी प्रगति को न केवल रेखांकित करती है, अपितु हमारे व्यवहार को भी नए आयाम प्रदान करती है।
9789349908345
Social Structure
Sociology
H 303.3 SHU
