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Vaishali Ki Nagarvadhu

By: Material type: TextTextPublication details: New Delhi Garima Publishers 2025Description: 455 pISBN:
  • 9788196342562
Subject(s): DDC classification:
  • H CHA A
Summary: मैं सहस्र बार इस शब्द को दुहराती हूँ! वज्जीसंघ का यह धिक्कृत क़ानून वैशाली जनपद के यशस्वी गणतंत्र का कलंक हैं। भन्ते, मेरा अपराध केवल यही है कि विधाता ने मुझे यह अथाह रूप दिया। इसी अपराध के लिए आज मैं अपने जीवन के गौरव को लांछना और अपमान के पंक में डुबो देने को विवश की जा रही हूँ। इसी से मुझे स्त्रीत्व के उन सब अधिकारों से वंचित किया जा रहा है जिन पर प्रत्येक कुलवधू का अधिकार है। - इसी पुस्तक से
List(s) this item appears in: New Arrivals March, 2026
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मैं सहस्र बार इस शब्द को दुहराती हूँ! वज्जीसंघ का यह धिक्कृत क़ानून वैशाली जनपद के यशस्वी गणतंत्र का कलंक हैं। भन्ते, मेरा अपराध केवल यही है कि विधाता ने मुझे यह अथाह रूप दिया। इसी अपराध के लिए आज मैं अपने जीवन के गौरव को लांछना और अपमान के पंक में डुबो देने को विवश की जा रही हूँ। इसी से मुझे स्त्रीत्व के उन सब अधिकारों से वंचित किया जा रहा है जिन पर प्रत्येक कुलवधू का अधिकार है। - इसी पुस्तक से

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