Vaishali Ki Nagarvadhu

Chatursen, Aacharya

Vaishali Ki Nagarvadhu - New Delhi Garima Publishers 2025 - 455 p.

मैं सहस्र बार इस शब्द को दुहराती हूँ! वज्जीसंघ का यह धिक्कृत क़ानून वैशाली जनपद के यशस्वी गणतंत्र का कलंक हैं। भन्ते, मेरा अपराध केवल यही है कि विधाता ने मुझे यह अथाह रूप दिया। इसी अपराध के लिए आज मैं अपने जीवन के गौरव को लांछना और अपमान के पंक में डुबो देने को विवश की जा रही हूँ। इसी से मुझे स्त्रीत्व के उन सब अधिकारों से वंचित किया जा रहा है जिन पर प्रत्येक कुलवधू का अधिकार है। - इसी पुस्तक से

9788196342562


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