| 000 | 03707nam a22001697a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260909160023.0 | ||
| 020 | _a9789392509681 | ||
| 082 | _aH 294.538 RAG | ||
| 100 |
_aRaghav, Shivajeet Singh _921728 |
||
| 245 | _aChaar dhaam, barah jyotirling yatra | ||
| 260 |
_aNew Delhi _bNBT India _c2025 |
||
| 300 | _a134p. | ||
| 520 | _aहमारा भारतवर्ष सदियों-सहस्राब्दियों से एक धर्मप्रधान देश रहा है। कहना न होगा कि चार धामों और बारह ज्योतिर्लिंगों की स्थापना इस देश में इसी धार्मिक मनोवृत्ति के कारण हुई। प्रस्तुत पुस्तक के लेखक, जो विगत चार दशकों से दिव्यांगता से अभिशप्त हो व्हीलचेअर पर बैठने को विवश हैं, ने अपनी उत्कट और अदम्य भक्ति-भावना से भावित-अनुप्राणित हो न केवल चारों धामों एवं बारहों ज्योतिर्लिंगों की सफल तीर्थयात्राएँ संपन्न कीं, बल्कि इन तीर्थों के अतिरिक्त, हरिद्वार, मथुरा, अजंता, एलोरा, खाटू श्याम, सालासर बाला जी तथा नेपाल स्थित पशुपतिनाथ तक की यात्राएँ कर ली हैं। इस पुस्तक को सामान्य पाठकों को ध्यान में रखकर लिखा गया है।दुर्घटनाजनित दिव्यांगता को 'प्रतिभा' में बदल डालने के जज्बे का नाम शिवजीत सिंह राघव है अपनी अदम्य कार्यक्षमता के बल पर, दिव्यांगता के बावजूद, दुनिया के बीसेक देशों की यात्राएँ कीं तथा अपनी अनन्य भक्ति के कारण देश के अनेक तीर्थों की सफल यात्राएँ भी कीं। IBN7 न्यूज चैनल की ओर से 'सुपर आइडल अवार्ड फॉर पर्सस विद डिसेबिलिटी' सम्मान से सम्मानित (2012) हुए। दिल्ली की एक संस्था ने आपको 'पर्सन हू इंस्पायर अदर्स' के टाइटल, तो मुंबई की 'NASEOH' ने 'डिसेबल्ड मैन ऑफ द ईयर' अवार्ड से सम्मानित किया। वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे के अवसर पर WHO द्वारा आपको जेनेवा में निमंत्रित किया गया। संप्रति, आप दिल्ली में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था, 'कुसुम स्पाइन एंड न्यूरो रिहैबिलिटेशन' के निदेशक हैं। | ||
| 650 |
_a4 Dhaam _a12 Jyotirling _921729 |
||
| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c362003 _d362003 |
||