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245 _aTeen shrestha kaviyo ka hindi patrakarita mein avadan
260 _aNew Delhi
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300 _a172p.
520 _aप्रस्तुत पुस्तक में तीनों कवियों के पत्रकारिता में अवदान पर व्यापक चर्चा की गई है। इन तीनों कवियों को साहित्य से भरपूर सम्मान एवं पत्रकारिता से अभूतपूर्व लोकप्रियता मिली। तीनों ने अपना-अपना साहित्यिक और पत्रकारीय लेखन लगभग साथ-साथ शुरू किया। इन्होंने साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता को भी अपनी अभिव्यक्ति का साधन बनाया। स्वाधीन भारत के पहले और दूसरे दशक के हिंदी साहित्यकारों, पत्रकारों को तराशने का काम भी इन अग्रणी संपादकों ने किया था। इन्हीं तीनों साहित्यकारों-संपादकों की कहानी इस पुस्तक में वर्णित की गई है। लेखक अच्युतानंद मिश्र का जन्म 2 दिसंबर, 1937 को गाजीपुर के एक गाँव में हुआ। इन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्राप्त की। ये पेशे से पत्रकार हैं और अपने समय के एक जुझारू संपादक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में लोकप्रिय रहे हैं।मौलिक/संपादित कृतियाँ हिंदी पत्रकारिता के शीर्षस्थ संपादक पंडित बाबूराव विष्णु पराडकर पर संपादित पुस्तक। समसामयिक विषयों पर लेखों का एक संकलन- 'सरोकारों के दायरे', हिंदी के प्रमुख समाचार पत्र और पत्रिकाओं का संपादन चार खंडों में। पुरस्कार/सम्मान : श्री गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'पत्रकार भूषण' सम्मान एवं उत्तर प्रदेश का 'यश भारती' सम्मान आदि ।
650 _aHindi Journalism
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