000 01362nam a22001697a 4500
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005 20260811164009.0
020 _a9788126710676
082 _aH 891.434 SOB
100 _aSobti, Krishna
_9814
245 _aShabdon ke aalok mein
260 _aNew Delhi
_bRajkamal Prakashan
_c2024
300 _a452p.
520 _aशब्दों के आलोक में' एक पुरानी जन्म तारीख के नए-पुराने मुखड़ों और कार्यकारी उभरते पाठ के रचनात्मक टुकडो की बंदिश है जिसे एक जिल्द में संजोया गया है ! पाठ न नएपन से आक्रांत है और न पुरानेपन से आतंकित ! जीने का एक ऐसा मौसम इसके आर-पार फैला है जो न लेखक की कार्य-क्षमताओं पर हावी है और न साहित्यिक मुखौटो से भयभीत ! ट्रैक पर दौड़ते हुए न किसी को पछाड़ने की हसरत और न किसी से पिछड़ने का डर !
650 _aHindi Kavya
_921425
942 _cB
999 _c361868
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