| 000 | 01783nam a22001817a 4500 | ||
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| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260712154911.0 | ||
| 020 | _a9789355182449 | ||
| 082 | _aH BHA D | ||
| 100 |
_aBharati, Dharmveer _920949 |
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| 245 | _aGunahon ka devta | ||
| 250 | _a89th ed. | ||
| 260 |
_aNew Delhi _bVani Prakashan _c2025 |
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| 300 | _a264p. | ||
| 520 | _aगुनाहों का देवता - धर्मवीर भारती के इस उपन्यास का प्रकाशन और इसके प्रति पाठकों का अटूट सम्मोहन हिन्दी साहित्य-जगत् की एक बड़ी उपलब्धि बन गये हैं। दरअसल, यह उपन्यास हमारे समय में भारतीय भाषाओं की सबसे अधिक बिकनेवाली लोकप्रिय साहित्यिक पुस्तकों में पहली पंक्ति में है। लाखों-लाख पाठकों के लिए प्रिय इस अनूठे उपन्यास की माँग आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी कि इसके प्रकाशन के प्रारम्भिक वर्षों में थी।—और इस सबका बड़ा कारण शायद एक समर्थ रचनाकार की कोई अव्यक्त पीड़ा और एकान्त आस्था है, जिसने इस उपन्यास को एक अद्वितीय कृति बना दिया है | ||
| 650 |
_aHindi Novel _920950 |
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| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c361674 _d361674 |
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