| 000 | 01127nam a22001817a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260629120333.0 | ||
| 020 | _a9789350729656 | ||
| 082 | _aH 305.42 KAL | ||
| 100 |
_aKalia, Mamta _915334 |
||
| 245 | _aBhawishya ka stri vimarsh | ||
| 250 | _a3rd ed. | ||
| 260 |
_aNew Delhi _bVani Prakashan _c2026 |
||
| 300 | _a106p. | ||
| 520 | _aMamta Kalia की किताब "भविष्य का स्त्री विमर्श" मे स्त्रियों की अस्मिता पर उठते सावालों का कटाक्ष पूर्ण जवाब, स्त्रियों को सलाह कि वे अपने दर्द को बेचकर खुद को कमजोर साबित न करे,लेखिका का उनसे आग्रह है की अपनी पीड़ा को पेशा न बनाए, किताब की शैली पाठकों को आकर्षित करने का माद्दा रखती हैं। | ||
| 650 |
_aFeminism _920630 |
||
| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c361531 _d361531 |
||