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020 _a9789364105095
082 _aH 305.5 CHA
100 _aChaturvedi, Jagdishwar
_978
245 _aNavjagran, brahmanvad aur loktantra
260 _aNew Delhi
_bAnamika Publishers
_c2025
300 _a167p.
520 _aप्रस्तुत पुस्तक में­ 16 अध्याय हो। यह पुस्तक बुनियादी रुप से रेनेसां के प्रसंग में­ इंटरनेट पर मोने जो व्याख्यान दिए हो। उसका एक अंश है। इन व्याख्यानों के माध्यम से रेनेसां के विभिन्न पहलुओं को खोलने की कोशिश की गई है। यहां पर वे सवाल बुनियादी तौर पर केंद्र में­ हो जिनका लोकतंत्रा के साथ संबंध है और जो हमारे आज के भारत को समझने में­ इससे मदद मिल सकती है। साथ ही उन तमाम पहलुओं की चर्चा की गई है जो लोकतंत्र के लिए चुनौती बनकर खड़े हुए हो। इस किताब के परिप्रेक्ष्य के केंद्र में­ महाराष्ट्र और बंगाल का नवजागरण, स्वाधीनता संग्राम, महात्मा गांधी और साम्प्रदायिक राजनीति है। आशा है , समाज विज्ञान और साहित्य के अध्येताओं को इसम­ व्यक्त विचारों और सामग्री से मदद मिलेगी। साथ ही नवजागरण का नया परिप्रेक्ष्य जानने का मौका मिलेगा।
650 _aBrahmanism
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