| 000 | 01657nam a22001937a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260612151006.0 | ||
| 020 | _a978818143 | ||
| 082 | _aCS 658.954 AGR | ||
| 100 |
_aAgrarwal, Pramod Kumar _920345 |
||
| 245 | _aBhartiya Prabadhan Paddhati | ||
| 260 |
_aNew Delhi _bVani Prakashan _c2008 |
||
| 300 | _a86p. | ||
| 520 | _a‘भारतीय प्रबन्धन पद्धति’ में समृद्ध भारतीय संस्कृति की विचारधाराओं का आधुनिक प्रबन्धन की धारणाओं के साथ सामंजस्य प्रस्तुत किया गया है। वैदिक समय से लेकर मध्ययुगीन, आधुनिक तथा अधुनातन भारत में प्रचलित प्रबन्धन की व्यवस्था भी की गयी है। आधुनिक प्रबन्धन के गुरु प्रोफेसर पीटर ड्रकर ने विश्वास प्रकट किया है कि सूर्य पूर्व से उदय होगा-शायद चीन या भारत से। इस पुस्तक में प्रस्तुत अवधारणाएँ भारत में कार्यरत प्रत्येक प्रबन्धक के लिए अति उपयोगी होंगी। | ||
| 600 |
_aCivil Services _920346 |
||
| 650 |
_aGeneral management _920347 |
||
| 700 |
_aAgrarwal, Urvashi _920348 |
||
| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c361397 _d361397 |
||