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082 _aCS DHO D
100 _aDhodawat, Devendra Kumar
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245 _aMaa (Mother)
260 _aNew Delhi
_bPrabhat Prakashan
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300 _a104p.
520 _aएक माँ ही है जो इम्तिहाँ नहीं लेती.. वरना खुदा भी कोई कसर नहीं छोड़ता जब भी गुस्सा हुई बापू का डर दिखाया माँ ने मौका डाँट का आने पर अपने आँचल में छुपाया माँ ने.. वो दुआओं का टीका दो घूँट मीठा दही. हर इम्तिहाँ में आज तक काम आ रहा वही माँ-बाप तो मोम हैं पल में पिघल जाते हैं... जब भी याद आती है बच्चों की मिलने निकल जाते हैं...
600 _aCivil Services
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