| 000 | 01254nam a22001697a 4500 | ||
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| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260108155413.0 | ||
| 020 | _a9788196213824 | ||
| 082 | _aH KAL R | ||
| 100 |
_aKalia, Ravindra _917031 |
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| 245 | _aChhooti Cigarette | ||
| 260 |
_aNoida _bSetu Prakashan _c2023 |
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| 300 | _a175 p. | ||
| 520 | _aरवीन्द्र कालिया के इस संस्मरण-संग्रह का शीर्ष आलेख छूटी सिगरेट भी कमबख्त आज पढ़कर वे दिन याद आते हैं जब कई मौकों पर उन्होंने सिगरेट छोड़नी चाही मगर नाकामयाब रहे। हर सिगरेट-प्रेमी की दिक्कत यही है की वह सोचता है-वह कल से सिगरेट पिन छोड़ देगा। कभी होंठ जले तो कभी उँगलियाँ, कभी दृ जली तो कभी बिस्तर लेकिन छूटी वह तब जब शरीर ने बगावत करनी शुरू की। | ||
| 650 |
_aSmaran _917032 |
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| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c360253 _d360253 |
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