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020 _a9788196213824
082 _aH KAL R
100 _aKalia, Ravindra
_917031
245 _aChhooti Cigarette
260 _aNoida
_bSetu Prakashan
_c2023
300 _a175 p.
520 _aरवीन्द्र कालिया के इस संस्मरण-संग्रह का शीर्ष आलेख छूटी सिगरेट भी कमबख्त आज पढ़कर वे दिन याद आते हैं जब कई मौकों पर उन्होंने सिगरेट छोड़नी चाही मगर नाकामयाब रहे। हर सिगरेट-प्रेमी की दिक्कत यही है की वह सोचता है-वह कल से सिगरेट पिन छोड़ देगा। कभी होंठ जले तो कभी उँगलियाँ, कभी दृ जली तो कभी बिस्तर लेकिन छूटी वह तब जब शरीर ने बगावत करनी शुरू की।
650 _aSmaran
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942 _cB
999 _c360253
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