| 000 | 01770nam a22001697a 4500 | ||
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| 005 | 20260108153142.0 | ||
| 020 | _a9788119899456 | ||
| 082 | _aH RAI S | ||
| 100 |
_aRai, Subhash _917019 |
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| 245 | _aDigambar Vidrohini Akka Mahadevi | ||
| 260 |
_aNoida _bSetu Prakashan _c2024 |
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| 300 | _a439 p. | ||
| 520 | _aयह एक अनूठी पुस्तक है : इसमें गम्भीर तथ्यपरक तर्कसम्मत शोध और आलोचना, सर्जनात्मक कल्पनाशीलता से किये गये सौ अनुवाद और कुछ छाया-कविताएँ एकत्र हैं। इस सबको विन्यस्त करने में सुभाष राय ने परिश्रम और अध्यवसाय, जतन और समझ, संवेदना और सम्भावना से एक महान् कवि को हिन्दी में अवतरित किया है। वह ज्योतिवसना थी, इसीलिए उसे ‘दिगम्बर’ होने का अधिकार था : अपने तेजस्वी वैभव के साथ ऐसी अक्क महादेवी का हिन्दी में हम इस पुस्तक के माध्यम से ऊर्जस्वित अवतरण का स्वागत करते हैं। रजा पुस्तक माला इस पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्न है। -अशोक वाजपेयी | ||
| 650 |
_aKavyanuvad _aChhaya Kavitanye _917020 |
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| 942 | _cB | ||
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