| 000 | 01519nam a22001697a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | 0 | ||
| 005 | 20260108152659.0 | ||
| 020 | _a9789393758088 | ||
| 082 | _aH SIN N | ||
| 100 |
_aSingh, Neelakshi _917015 |
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| 245 | _aJinki Mutthiyon Mein Surakh Tha | ||
| 260 |
_aNoida _bSetu Prakashan _c2022 |
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| 300 | _a230 p. | ||
| 520 | _aजिनकी मुट्ठियों में सुराख था नीलाक्षी सिंह द्वारा लिखित कहानी-संग्रह है। नीलाक्षी सिंह की कहानियाँ अपने कथ्य और शिल्प में असाधारण हैं। इसकी बड़ी वजहों में एक यह है कि जिन विवरणों के सहारे ये कथ्य और शिल्प का निर्माण करती हैं, उसकी द्विध्रुवीयता एक पाठक के रूप में हमें आमंत्रित करती है। नीलाक्षी सिंह की कहानियों में शिल्प कथ्य तक पहुँचने का साधन नहीं रहता, वह खुद ही धीरे-धीरे रासायनिक अन्तक्रियात्मकता के सहारे कथ्य में बदल जाता है। | ||
| 650 |
_aKahani _917016 |
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| 942 | _cB | ||
| 999 |
_c360246 _d360246 |
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