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| 020 | _aKuchh Ummid Kuchh Vichar Aur Kuchh Batein | ||
| 082 | _aH 303 APU | ||
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_aApurva _916980 |
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| 245 | _aKuchh Ummid, Kuchh Vichar Aur Kuchh Batein | ||
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_aNoida _bSetu Prakashan _c2024 |
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| 300 | _a648 p. | ||
| 520 | _aकुछ उम्मीद, कुछ विचार और कुछ बातें – अपूर्व सूक्ष्म-शब्दजाल उन्मुख अकादमिक विमर्श और आसानी से समझ में आने वाले अखबारी लेखन के बीच अक्सर एक विभाजन रेखा बनायी जाती है। यह विभाजन रेखा हमारे बौद्धिक जुड़ाव के गिरते स्तर के मुख्य कारणों में से एक रही है। सार्वजनिक टिप्पणीकारों का एक वर्ग- जो अक्सर समाचारपत्रों और वेब पोर्टलों में योगदान करते हैं- गम्भीर शैक्षणिक कार्यों के प्रति उदासीन रहते हैं। यह उदासीनता उनके स्पष्टीकरण को उथला और सतही बनाती है। दूसरी ओर, शिक्षाविद् समकालीन प्रश्नों के महत्त्व को समझने में विफल रहते हैं। वे हमेशा सामाजिक मुद्दों का जवाब देने में देर करते हैं। अपूर्व जी के लेख इस सम्बन्ध में बेहद प्रासंगिक हैं। इन लेखों में सामाजिक मुद्दों की समीक्षा इस अन्दाज से की गयी है कि न केवल उस विषय की तात्कालिकता को स्पष्ट किया जा सके अपितु उसके व्यापक ऐतिहासिक प्रभाव को भी विश्लेषण की परिधि में बाँधा जा सके। – हिलाल अहमद (प्रस्तावना से) | ||
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