| 000 | 03235nam a22001937a 4500 | ||
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| 040 | _cAACR-II | ||
| 082 | _aSA 891.4308 SIN | ||
| 100 |
_aSingh, Kashinath _91053 |
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| 245 | _aHansa karo puratan baat | ||
| 260 |
_aNew Delhi _bRajkamal _c2023 |
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| 300 | _a294p. | ||
| 520 | _aहंसा करो पुरातन बात’ कथाकार-उपन्यासकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में उनके 1989 से 2022 तक के साक्षात्कार हैं। साक्षात्कारों को प्रकाशन-क्रम से रखा गया है ताकि पाठक उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा को प्रामाणिकता के साथ समझ सकें। काशीनाथ जी से जुड़ा वह हर सवाल यहाँ मौजूद है जिसमें एक पाठक की जिज्ञासा हो सकती है। ये सभी साक्षात्कार वे हैं जो उनकी पूर्व-प्रकाशित दोनों पुस्तकों, ‘गपोड़ी से गपशप’ और ‘बातें हैं बातों का क्या’ में नहीं हैं। ‘परिशिष्ट’ में ऐसे साक्षात्कार हैं जिनमें सीधे-सीधे सवाल-जवाब की पद्धति नहीं है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता या पत्र-पत्रिका ने उन्हें ‘बातचीत’ या ‘बातचीत पर आधारित’ कहा है। इन साक्षात्कारों में ‘सदी का सबसे बड़ा आदमी’ कहानी के प्रति उनका मोह दृष्टिगोचर होता है। ‘काशी का अस्सी’ को वे अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास तथा ‘अपना मोर्चा’ को भूमिका मात्र मानते हैं। सामासिक संस्कृति की पक्षधरता और मनुष्यता में उनका विश्वास भी प्रकट होता है। कहानी लेखन में बदलाव, कहानी से संस्मरण की ओर शिफ्ट होने के कारण, देश-विदेश-छात्र राजनीति एवं वर्तमान लेखन पर उनके विचार इन साक्षात्कारों में अभिव्यक्त हैं। | ||
| 650 |
_aHindi Literature; Interview; Sahitya Akademi awarded _91054 |
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