000 02474nam a22001817a 4500
999 _c346892
_d346892
003 0
005 20220812202438.0
020 _a9788194971399
082 _aH MIS K
100 _aMishra, Kamlakar
245 _aSubha
260 _aDelhi
_bShivank prakeshan
_c2022.
300 _a138 p.
520 _aइस संकलन का शीर्षक जिस कहानी से लिया गया है वो एक ऐसे आदर्श समाज के स्वप्न की कहानी है जिसमे बेटी के गुणों का मूल्यांकन दहेज से ऊपर करने की कल्पना की गयी है। लगभग सभी कहानियाँ सच्ची घटनाओं पर आधारित है जिनमे पात्रों, स्थानों एवं शहरों के नामों में परिवर्तन किया गया है! आरक्षण, प्रेम, संकोच, समर्पण, लोभ, स्वार्थ, रिश्तों की व्यावसायिकता इत्यादि विषयों पर कुल मिलाकर १६ कहानियों का ये संग्रह अनुभव एवं चिंतन का संयोजन है जिसमे सन्देश भी है और मनोरंजन भी! मृगतृष्णा भी है मृग मरीचिका भी ! वर्तमान परिदृश्य में कार्यस्थल में होने वाले कर्मचारी शोषण का भी वर्णन है तो संकोच के कारण दम तोड़ते प्रेम की व्यथा भी है ! पारिवारिक सामाजिक मर्यादाओं की सीमा रेखा में कैद असफल प्रेम कहानी है तो मित्रों के प्रगाढ़ सम्बन्ध की भी कहानी है इस संकलन में! हर कहानी कहीं न कहीं समाज में हमारे आस पास की घटनाओं की गवाही देती है !
650 _aKamlakar Mishra 'Kamal'
650 _aHindi fiction
942 _cB