Kapooriya, B.K. Yogita

Divyata ki aur badte kadam bhag 1 - New Delhi Little Bird Publications 2024 - 143p.

इसी प्रकार विश्व की प्रत्येक आत्मा में परमात्मा की दी हुई आत्म-शक्तियाँ एवं दिव्य-गुण निहित हैं। परन्तु जैसे ही जीवात्मा माया से आवृत भूमण्डल पर कदम रखती है। वो भूल जाती है कि वो किसकी सन्तान है? उसके पारलौकिक परमपिता परमात्मा शिव ने उसे किस लिए भेजा हैं? उस के दिव्य-गुण व दिव्य आत्म-शक्तियाँ कौन सी हैं? उस परमपिता से बिछुड़ कर यह नश्वर शरीर क्यूँ धारण किया है? वो जीवात्मा माया के फेरे में आ कर अपना स्वरूप, गुण, शक्ति, अपना लक्ष्य, यहाँ तक कि परमपिता को भी विस्मृत कर देती है। भौतिकता के सुनहरे म×च पर पाँच विकारों रूपी रावण भी उसे आ घेरता है।

9789363061286

H 294.54 KAP