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    <title>Leo tolstoy ki chuni hui kahaniyan</title>
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    <namePart>Tolstoy, Leo</namePart>
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      <placeTerm type="text">New Delhi</placeTerm>
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    <publisher>Garima Publishers</publisher>
    <dateIssued>2026</dateIssued>
    <issuance>monographic</issuance>
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    <extent>158p. </extent>
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  <abstract>जनक्रान्ति के माध्यम से सोवियत रुस को महान शक्ति के रूप में विश्व के समक्ष लाने वाले लेनिन की वहन आन्ना उल्यानवा ने एक स्थान पर लिखा थाµ ‘टालस्टाय की कहानियों को उनकी दूसरी रचनाओं की ही तरह हमारे साहित्य की स्वर्ण निधि में जगह मिलनी चाहिए । किसी भी सत्य कलात्मक रचना की तरह ये कहानियाँ भी पढ़कर सुख की अनुभूति होती है तथा इनका अकृत्रिम सादगी पूर्ण आकर्षण छोटी–वय से ही सचेत पठन–पाठन की अभिलाषा जगाता है ।’ टालस्टाय सिर्फ बाल–साहित्यकार ही न थे बल्कि उपन्यासकार चिन्तक, विचारक व दार्शनिक भी थे । ‘युद्ध और शान्ति’ तथा ‘अन्ना कारेनिना’ नामक उनके दो उपन्यास संसार में काफी प्रसिद्ध हैं । चिन्तक, दार्शनिक व विचारक के रूप में ‘मेरी मुक्ति की कहानी’, ‘सामाजिक कुरीतियाँ’, ‘हमारे जमाने की गुलामी’, ‘हम क्या करे’, ‘ईसा की सिखाव’, ‘स्त्री और पुरुष’, ‘धर्म और सदाचार’, ‘जीवन साधना’, ‘बुराई कैसे मिटे’ आदि पुस्तकों का संकलन है । इन रचनाओं के माध्यम से उन्होंने विश्व को आदर्श की शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है । ‘बालकों का विवेक’, ‘कलवार की करतूत’ ‘अँधेरे में उजाला’ आदि उनकी नाट्य पुस्तकें विशेषकर प्रसिद्ध हैं । इन नाट्य–पुस्तकों में उन्होंने बच्चों हेतु नाटक के साथ–साथ वयस्कों के लिए भी सामाजिक आदर्श प्रस्तुत किया है । प्रस्तुत पुस्तक में लियो टालस्टाय के बाल साहित्य की चुनी हुई कतिपय कहानियों को स्थान दिया गया है । सभी कहानियाँ बाल मनोविज्ञान के अनुकूल हैं तथा हर वर्ग के बच्चों को नैतिक शिक्षा व आदर्श प्रदान करने में सक्षम हैं ।</abstract>
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    <topic>Hindi Stories</topic>
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  <classification authority="ddc">H TOL L </classification>
  <identifier type="isbn">9788119633173</identifier>
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