01155nam a22001577a 4500003000200000005001700002020001800019082001400037100003000051245001800081260004100099300001100140520081500151600002000966650001100986020260430144355.0 a9789355624949 aCS DHO D  aDhodawat, Devendra Kumar  aMaa (Mother)  aNew Delhi bPrabhat Prakashan c2025 a104p.  aएक माँ ही है जो इम्तिहाँ नहीं लेती.. वरना खुदा भी कोई कसर नहीं छोड़ता जब भी गुस्सा हुई बापू का डर दिखाया माँ ने मौका डाँट का आने पर अपने आँचल में छुपाया माँ ने.. वो दुआओं का टीका दो घूँट मीठा दही. हर इम्तिहाँ में आज तक काम आ रहा वही माँ-बाप तो मोम हैं पल में पिघल जाते हैं... जब भी याद आती है बच्चों की मिलने निकल जाते हैं... aCivil Services  aPoems