पूर्वी उत्तर प्रदेश जहाँ एक तरफ गरीबी की मार झेल रहा था, वहीं दूसरी तरफ 1970 के दशक से माफिया गतिविधियों की शुरुआत पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही शुरू हुई। शुरुआती दौर में गोरखपुर इसका केंद्रबिंदु बना। माफिया गिरोहों में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। वर्चस्व का मतलब जमीनें हड़प लेंगे, खरीदेंगे नहीं। पेट्रोल-डीजल भरा लेंगे, पर पैसे नहीं देंगे; कोई आँख मिलाकर बात नहीं करेगा। गोरखपुर में हुए गैंगवार ने पूर्वांचल के वाराणसी, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, प्रयागराज, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही जिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया।