Ramyabhoomi
Material type:
TextPublication details: New Delhi Radhakrishana Prakashan 2025Description: 271pISBN: - 9789349159662
- SA SAI B 1976
| Item type | Current library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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Gandhi Smriti Library | SA SAI B 1976 (Browse shelf(Opens below)) | Available | 181247 |
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| SA SAH B 6th ed. 1975 Tamas | SA SAH N 1986 Rich like us | SA SAI 1995 Maharathi | SA SAI B 1976 Ramyabhoomi | SA SAL A 2018 Blind Lady’s Descendants | SA SAM A 1990 Do gaz zameen | SA SAN 2023 Mujhe pahachaano |
असमिया समाज के अद्भुत चितेरे भवेन्द्रनाथ शइकिया का समूचा साहित्य आम असमिया के सुख-दुख का दस्तावेज़ है। उनकी क़िस्सागोई भी ग़ज़ब की है। वह पाठकों को तुरन्त बाँध लेती है। पाठक उनकी कहानियों और उपन्यासों को अपनी आपबीती की तरह पढ़ने लगते हैं। भवेन्द्रनाथ के कथा-संसार की सबसे बड़ी ख़ूबी हैं उनके स्त्री पात्र। वैसे तो वे अपने सभी पात्रों के मनोविज्ञान को बहुत बारीकी से विश्लेषित करते हैं मगर जब बात स्त्री पात्रों की आती है तो वे हमें चकित कर देते हैं। ‘रम्यभूमि’ की कथा के केन्द्र में भी एक स्त्री चरित्र योगमाया है। विपन्न परिवार की लड़की योगमाया के सम्बन्ध घर आने-जाने वाले एक दबंग पुरुष से बन जाते हैं। इस सम्बन्ध को न परिवार स्वीकारता है, न समाज। पुरुष विवाहित है और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो जाती है मगर वह उसके जीवन-यापन के लिए पर्याप्त धन-सम्पत्ति छोड़ जाता है। लेकिन इससे योगमाया के जीवन का संघर्ष कम नहीं हो जाता। वह समाज के द्वारा अस्वीकृत सम्बन्ध के साथ जीती है और उसके बच्चों को भी उस यातना से गुज़रना पड़ता है। योगमाया का त्रासद जीवन पाठक के मन-मस्तिष्क को निरन्तर विचलित रखता है। ‘रम्यभूमि’ का कैनवास बहुत बड़ा है। यह केवल एक परिवार की संघर्ष-गाथा भर नहीं है, अपने समय की कहानी भी कहता है। इस कहानी में एक हरा-भरा जंगल कैसे धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता जाता है, कैसे नए-नए मानवीय सम्बन्ध बनते-बिगड़ते हैं, नई समस्याएँ और चुनौतियाँ आती हैं और एक शहरी समाज आकार लेता जाता है, सब कुछ शामिल है।

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