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Naya naari vimarsh : vartalap me

By: Material type: TextTextPublication details: New Delhi LIttle Bird Publications 2026Description: 198 pISBN:
  • 9789363066458
Subject(s): DDC classification:
  • H 305.42 KAL
Summary: अब एक नजर पिछले एक दशक के महिला लेखन पर डालना प्रासंगिक होगा क्योंकि स्त्री की अवस्थिति, संघर्ष, प्रगति और चेतना का यह एक प्रामाणिक आईना है। इसमें वरिष्ठ से लेकर युवा रचनाकारों का योगदान रहा है। स्त्री का जो बेधक, बेधड़क, बुलंद रूप आज सामने आ रहा है उसके पीछे हमारी पूर्व व अपूर्व रचनाकारों का योगदान रहा है। महादेवी वर्मा ने सन् 1934 में ही लिख दिया था, ”हमे न किसी पर जय चाहिए न पराजय; न किसी की प्रभुता चाहिए न किसी पर प्रभुत्व; केवल अपना वह स्थान चाहिए, वह स्वत्व चाहिए जिसके बिना इस समाज का उपयोगी अंग नहीं बन सकती।“ स्त्री विमर्शकार सिमोन द बोवुआ के सिर विजय और विचार का सेहरा बाँधते हैं जबकि सिमोन से बहुत वर्ष पहले महादेवी वर्मा ने अपने गद्य से और सुभद्रा कुमारी चैहान ने अपने पद्य से स्त्राी की शक्ति का जयघोष किया था।
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Books Books Gandhi Smriti Library H 305.42 KAL (Browse shelf(Opens below)) Available 181608
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अब एक नजर पिछले एक दशक के महिला लेखन पर डालना प्रासंगिक होगा क्योंकि स्त्री की अवस्थिति, संघर्ष, प्रगति और चेतना का यह एक प्रामाणिक आईना है। इसमें वरिष्ठ से लेकर युवा रचनाकारों का योगदान रहा है। स्त्री का जो बेधक, बेधड़क, बुलंद रूप आज सामने आ रहा है उसके पीछे हमारी पूर्व व अपूर्व रचनाकारों का योगदान रहा है। महादेवी वर्मा ने सन् 1934 में ही लिख दिया था, ”हमे न किसी पर जय चाहिए न पराजय; न किसी की प्रभुता चाहिए न किसी पर प्रभुत्व; केवल अपना वह स्थान चाहिए, वह स्वत्व चाहिए जिसके बिना इस समाज का उपयोगी अंग नहीं बन सकती।“ स्त्री विमर्शकार सिमोन द बोवुआ के सिर विजय और विचार का सेहरा बाँधते हैं जबकि सिमोन से बहुत वर्ष पहले महादेवी वर्मा ने अपने गद्य से और सुभद्रा कुमारी चैहान ने अपने पद्य से स्त्राी की शक्ति का जयघोष किया था।

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