Param Yoddha : Ye Dil Mange More
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TextPublication details: New Delhi Little Bird Publications 2026 Description: 179 pISBN: - 9789363068698
- H 920 SIN
| Item type | Current library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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Gandhi Smriti Library | H 920 SIN (Browse shelf(Opens below)) | Available | 181512 |
पुरोवाक्
सेना की गौरवमयी वर्दी पहने रणक्षेत्र में जाते समय उसने अपनी प्रेयसी को उदास देख जेब से वॉलेट निकाला था, वॉलेट से एक ब्लेड निकाल अपनी उँगली चीर दी और बहते हुए खून से उसकी माँग भर दी थी तथा वादा करता गया था, वो जल्द ही लौटेगा। पर कहाँ, देश की खातिर उसने वादा तोड़ दिया, लौटा भी तो तिरंगे में लिपटकर। आज भी उसकी प्रेयसी अपने शाश्वत प्रेम की खातिर अविवाहित है, जैसे अभी भी उसका इंतज़ार है।
ये कहानी है परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा की और उसकी प्रेयसी डिंपल चीमा की। यही इंतज़ार उनके परिवार को भी था। उनके पिता जी०एल० बत्रा जी लिखते हैं-
"दुनिया के लिए वे एक हीरो, एक जाँबाज सैनिक और कारगिल विजय में योगदान देनेवाले एक होनहार ऑफिसर तथा सच्चे देशभक्त थे, लेकिन हमारे लिए तो वे हमारा प्यारा-दुलारा बेटा और 24 साल के एक नन्हे-से फरिश्ते थे। हमने उनकी शादी, उनके परिवार और उनके भविष्य के लिए कैसे-कैसे सपने सजाए थे। हम यहाँ उम्मीद लगाए बैठे थे कि वे लड़ाई जीतकर वापस आएँगे तो हम सब मिलकर उनकी उपलब्धियों पर जश्न मनाएँगे। हम उनसे उनके मिशन के बारे में पूछेंगे, उनके वीरतापूर्ण कार्यों की कहानियाँ सुनेंगे और वे हमें बताएँगे कि किस प्रकार वह ऑपरेशन पर गए और वहाँ किस तरह हम सबको मिस किया।
हमने विक्रम के सारे पत्र सँभालकर रखे थे और यही सोच-सोचकर मन को तसल्ली दे रहे थे कि कुछ समय की तो बात है, उसके बाद हम सब उनका पत्र रिसीव करने की बजाय उनको ही रिसीव करेंगे। हम सोच रहे थे कि वे लड़ाई से सुरक्षित वापस लौटकर हमारी बाँहों में आएँगे, लेकिन यहाँ उनकी जगह पर उनका पार्थिव शरीर आया और हमारे कान उनकी मधुर आवाज सुनने और हमारी आँखें उनकी चमकती आँखों को देखने के लिए तरसती ही रह गई। विक्रम ने देश के लिए अपने सपनों, अपनी इच्छाओं और अपनी खुशियों को त्याग दिया था।"

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