Gaan Gungaan
Material type:
TextPublication details: Noida Setu Prakashan 2024Description: 414 pISBN: - 9788119899937
- H 780.954 DES
| Item type | Current library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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Gandhi Smriti Library | H 780.954 DES (Browse shelf(Opens below)) | Available | 181375 |
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| H 780.954 Gayanacharya Pt. Balkrishan bua Ichalkaranjikar ki Bhartiya sangeet ko den / translated by Kaumudi Kshirsagar Barde | H 780.954 Raag vishleshan | H 780.954 CHA 2nd ed ע��� �� ����� �� ����;Sangeet ke gharonon | H 780.954 DES Gaan Gungaan | H 780.954 GAR Bharat ke sangeetkar | H 780.954 GHO ��ƿ�� �� ����� �� �۳��;Kanraha kaa udbhav or vikas | H 780.954 HUR Divya virasat : dagar wa dhrupad |
हमारे शास्त्रीय संगीत के रसिकों की कोई कमी नहीं है। नयी तकनालजी ने उसे सहज सुलभ करा के उनकी संख्या शायद कई गुना बड़ा दी है। लेकिन सार्वजनिक परिसर में संगीत और संगीतकारों पर विचार-विश्लेषण का बहुत अभाव है। यह अभाव हिन्दी अंचल में विकराल है हालाँकि ज्यादातर घराने हिन्दी अंचल में ही उपजे और वहीं से गायब हैं। संगीतकारों की आपस में चर्चा होती है, वाद-विवाद, बहस आदि भी लेकिन उसकी सार्वजनिक अभिव्यक्ति नहीं होती। बहुत कम संगीतकारों ने स्वयं लिखकर विचार या विश्लेषण किया है। सत्यशील देशपाण्डे उन दुर्लभ संगीतकारों में हैं (जिनकी पीढ़ी में और कोई, हमारे जाने, नहीं है) जिन्होंने समझ, संवेदना, रसिकता और बुद्धि से संगीत के विभिन्न पक्षों और अपने अनेक बुजुर्ग संगीतकारों पर मराठी में लिखा है। संगीत पर यह मूल्यवान् चिन्तनपरक सामग्री हिन्दी अनुवाद में, एक पुस्तक के रूप में, प्रकाशित करते हुए हमें प्रसन्नता है। यह पुस्तक हिन्दी अंचल के संगीत-रसिकों का रसास्वादन सघन और सचेत करने में सहायक होगी ऐसी उम्मीद है।

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