Pitaji aur tareekh
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TextPublication details: Delhi Shivank prakashan 2022.Description: 108 pISBN: - 9788194971382
- H MIS K
| Item type | Current library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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Gandhi Smriti Library | H MIS K (Browse shelf(Opens below)) | Available | 168421 |
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इस उपन्यास में न्यायपालिका के साथ साथ समाज के अन्य हिस्सों में व्याप्त एवं प्रचलित जटिलताओं को सांकेतिक रूप से उजागर करने का बहुत छोटा प्रयास हुआ है! आज हमारे देश में न्यायपालिका की जो स्थिति है वो पीड़ित वर्ग ही समझ सकता है। जिसे कभी उस परिसर में प्रवेश की आवश्यकता नहीं पड़ी वो समझ ही नहीं सकता तारीख क्यों पड़ती है ? नजराना क्यों दिया जाता है ? हाकिम किसे कहते हैं ? देश भर में न्यायालयों में लंबित केसों की संख्या रोज बढ़ती जा रही है ! बमुश्किल एक केस का फैसला होता है तो १० नए मुक़दमे दर्ज हो जाते हैं। बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती सामाजिक जटिलताएं, कुटिलताएं, लोभ, क्रोध इत्यादि विकृतियां ही तो बढ़ते हुए झगड़ों की वजह है जिसकी वजह से न्यायालयों में मुकदमों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है!
इस उपन्यास में इस बात को चित्रित करने का प्रयास हुआ है की निचली अदालतों में अधिवक्ताओं एवं मुवक्किलों की क्या स्थिति है, कैसे शोषण होता है, कैसे कानून की उपलब्धता समर्थ वर्ग के लिए आसान होती है और कमजोर वर्ग के लिए कठिन ये भी चित्रित करने का प्रयास हुआ है कि कानून की धाराओं का प्रयोग अलग अलग समूह के लोगों के लिए अलग तरीके से किया जा सकता है बस वो सामर्थ्य होनी चाहिए और सामर्थ्य का सीधा तात्पर्य आर्थिक क्षमता से है !

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