Maharani Durgawati
Material type:
TextPublication details: New Delhi Prabhat books 2020.Description: 236 pISBN: - 9789386300270
- H VER V
| Item type | Current library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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Gandhi Smriti Library | H VER V (Browse shelf(Opens below)) | Available | 168101 |
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| H VER V Sangam and prem ki bhent | H VER V Sona | H VER V Soti aag | H VER V Maharani Durgawati | H VES T Baraf Mahal | H VIB Chal Khusaro Ghar Aapne | H VIB Vibhajan ki kahaniyan\edited by Musharraf Alam Zauqui |
महारानी दुर्गावती उद्यान में घूमने लगी। फूलों दुर पर अधमुँदी बड़ी-बड़ी आँखें रिपट-रिपट सी जा रही थीं, पँखुड़ियों की गिनती तो बहुत दूर की बात थी। कभी ऊँचे परकोटे पर दृष्टि जाती, कभी नीचे के परकोटे और ढाल पर, दूर के पहाड़ों पर और बीच के मैदानों के हरे-भरे लहराते खेतों पर। दूर के जंगल में जैसे कुछ टटोल रही हो, फुरेरू आती और नसें उमग पड़तीं। क्या ऐसे धनुष-बाण नहीं बनाए जा सकते, जिनसे कोस भर की दूरी का भी लक्ष्यवेध किया जा सके ? हमारे कालंजर की फौलाद संसार भर में प्रसिद्ध है, यहाँ के खंग, भाले, तीर, छुरे युगों से ख्याति पाए हुए हैं। सुनते हैं, कभी चार हाथ लंबा तीर तैयार किया जाता था, जो हाथी तक को वेधकर पार हो जाता था। चंदेलों का वैभव फिर लौट सकता है, बघेले, बुंदेले और चंदेले मिलकर चलें तो सबकुछ कर सकते हैं; तुर्क, मुगल, पठान, सबको हरा सकते हैं। कैसे एक हों ?

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