Kajal ki med (Record no. 361607)
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| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
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| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9789369447978 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | H RAK A |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | Rakhecha, Anila |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Kajal ki med |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | New Delhi |
| Name of publisher | Vani Prakashan |
| Year of publication | 2025 |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 212p. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | हिन्दी की प्रख्यात कवयित्री अनिला राखेचा की कविताओं का यह प्रथम संग्रह काजल की मेड़ अनेकानेक भाव, संवेदना और विचारों का अद्भुत स्तबक है। प्रेम, संघर्ष, घर-परिवार, कुटुम्ब और बाह्य समाज के विविध अनुभवों और अन्तर्मन की बहुविध तरंगों से सम्पन्न यह संग्रह कुछ सर्वथा नवीन प्रश्नों और चिन्ताओं की गहन अभिव्यक्ति करता है। ‘क्या तुम मेरे उत्तराधिकारी बनोगे?' जैसी कविता पाठक को आकुल-व्याकुल कर देती है। निश्चय ही इस संग्रह के केन्द्र में स्त्री-लोक है, लेकिन वह समस्त सृष्टि का समाहार करता हुआ अनेक युग्मों एवं सम्बन्धों की रचना करता है। पुरुष-प्रेम की भी कुछ विरल कविताएँ यहाँ उपस्थित हैं जिन्हें साहसिक और अपारम्परिक कहा जा सकता है। लेकिन इन सभी कविताओं की आधारभूमि करुणा है— ‘संध्या की सुरमई वेला में/ अधीर हो उठता उसका समर्पण/मेदिनी से मिलन के लिए’ अत्यन्त संवेदनशील, भावप्रवण, ऐन्द्रिक यह रचनाकार अप्रमेय प्रतिभा के ऐश्वर्य से विभूषित है जिसके प्रमाणस्वरूप ये पंक्तियाँ द्रष्टव्य हैं— ‘इस तरह मैं मर कर भी ज़िन्दा रह जाऊँगी/ बचा रहेगा घोर अन्धकार में भी/थोड़ा-सा उजाला हमारे नाम का’ अनिला राखेचा का यह भरा-पूरा संग्रह उन्हें एक अप्रतिम कवि-स्वर के रूप में स्थापित करता है। पढ़ते हुए ये पंक्तियाँ आपको हठात् रोक लेंगी— ‘यादों की लहलहाती फ़सल में/बिजूके-सी खड़ी थी मैं/...उस रोज़ अचानक से तुम आये/किसी प्रवासी पक्षी की तरह/मेरे मस्तक पर’ हिन्दी कविता की यह नयी नागरिक काजल की मेड़ के साथ सभी काव्य मेड़ों को तोड़ कर एक नये उर्वर काव्य त्रिलोक की सृष्टि करेगी, ऐसी कामना है और सहृदय पाठक उन्हें वांछित स्नेह तथा समर्थन प्रदान करेंगे। —अरुण कमल ★★★ अनिला राखेचा की कविताएँ परम्परागत जीवन की सहज ऊष्मा और आत्मीयता से ओतप्रोत हैं। उनकी कविताओं में प्रेमी मन की गगनचुम्बी उड़ान है तो उसे धरती की सच्चाइयों पर उतार लाने वाले गुरुत्वाकर्षण की पहचान भी। सम्पृक्ति और विरक्ति के ताने-बाने से रची ये कविताएँ प्रेम के परागण और पूर्णता की विकल उत्कण्ठा की कविताएँ हैं—प्रेम के उत्कर्ष की कविताएँ। इस संग्रह की कविताओं में चकाचौंध करने वाला प्रकाश नहीं, अँधियारे को चुनौती देते सैकड़ों जुगनुओं की झिलमिलाहट है। सन्धिप्रकाशी रागों जैसे झुटपुटेपन की एक व्याप्ति इन कविताओं की विशिष्टता है जिससे एक तरह की रहस्यात्मकता की सृष्टि होती है और एक अनुरागी क़िस्म की स्वप्नशीलता को विस्तार मिलता है। जीवन के सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रेम के अनवरत अनुनाद और उसके अखण्ड अनुष्ठान के आत्मीय अनुगायन के बावजूद एक जोगिया रंगत इन कविताओं को देशज दार्शनिक परम्पराओं से संयुक्त रखती है। अनिला राखेचा की कविताओं का अपना एक घरोआ मिज़ाज और एक भिन्न आस्वाद है। उम्मीद है, हिन्दी साहित्य संसार में प्रेम और प्रार्थना की इन कविताओं का स्वागत होगा। —प्रियंकर पालीवाल |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Poetry Collection |
| 9 (RLIN) | 20844 |
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| Koha item type | Books |
| Lost status | Home library | Current library | Date acquired | Cost, normal purchase price | Full call number | Accession Number | Koha item type | Public Note |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Gandhi Smriti Library | Gandhi Smriti Library | 2026-07-07 | 695.00 | H RAK A | 181705 | Books | 695.00 |
