Sobti-vaid samvad : lekhan aur lekhak (Record no. 361470)

MARC details
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003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER
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005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION
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020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
ISBN 9788126713004
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number H 891.43 SOB
100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME
Personal name Sobti, Krishna
245 ## - TITLE STATEMENT
Title Sobti-vaid samvad : lekhan aur lekhak
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT)
Place of publication New Delhi
Name of publisher Rajkamal Prakashan
Year of publication 2015
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Number of Pages 207p.
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc क दिन दो बड़े मिल बैठे और बातें चल निकलींदृगुज़रे हुए ज़माने की, अगले ज़मानों की। वर्तमान तो बेशक हर पहलू से उन बातों में शामिल रहा। बातों का सिलसिला दशकांे के आर-पार फैलता रहादृअपने समय को सीधे पढ़ने, समझने और लगातार ढीठ होते हुए युग की बगै़रत निर्लज्ज आँखों में आँखें डालकर देखते रहने के संकल्प के साथ। हमारे दो महत्त्वपूर्ण लेखक, कृष्णा सोबती और कृष्ण बलदेव वैद। शिमला के राष्ट्रपति निवास का उर्वर वातावरण और दशकों का सहेजा, रचा और निभाया हुआ बौद्धिक उत्तेजन और रचनात्मक तापदृ‘सोबती-वैद संवाद’ इन्हीं तत्त्वों के संयोग और संयोजन का परिणाम है। इस संवाद में से गुज़रते हुए हम अपने देखे हुए वक़्त को अपने दो विशिष्ट रचनाकारों की नज़र से एक बार फिर देखते हैं और आज के नेपथ्य की आहटें सुनने लगते हैं। इस अनौपचारिक बातचीत में आप दो अलग-अलग वैचारिक मुखड़ों को पहचानते हैं, उनकी वैचारिक प्रक्रिया को और रचनात्मक पाठ की गहराइयों को भी। इन दो कलमों की अपनी अपनी धड़कनें भी सुनी जा सकती हैंदृजिनसे ‘ज़िन्दगीनामा’, दिलो-दानिश’, ‘उसका बचपन’, ‘गुज़रा हुआ ज़माना’, ‘हम हशमत’, ‘ऐ लड़की’, ‘विमल उफषर्् जाएँ तो जाएँ कहाँ’ और ‘काला कोलाज’, जैसी क्लासिक हो चली कृतियाँ कैसे और कब रची गईं, कौन-सी बेचैनी किस किताब केे पन्नों पर साकार हुई, कैसे और किस ब्रान्ड का काग़ज़ और किस नाम का पेन था जो सृजनात्मक घटित का साक्षी रहादृयह सभी कुछ इस संवाद में उजागर होता है। और उजागर होता है वह पूरा युग भी जिसमें बँटवारा हुआ, आज़ादी मिली, गांधी की हत्या हुई, देश की बहाली के नये स्वप्न शुरू हुए, नयी विचारधाराओं ने नये हौसले दिए, उत्तरआधुनिकता ने किष्स्म-किष्स्म के अन्त घोषित किए, और आखि़र में भूमंडलीकरण ने सब कुछ को झंझोड़ डाला। यह सब इस संवाद का हिस्सा है। और इसीलिए हर अपूर्व मुलाकषत की तरह अधूरी होते हुए भी, यह अनूठी किताब हमें एक मुकम्मल पाठकीय स्मृति देकर ख़त्म होती है।
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Hindi Samvad
9 (RLIN) 20491
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Koha item type Books
Holdings
Lost status Home library Current library Date acquired Cost, normal purchase price Full call number Accession Number Koha item type Public Note
  Gandhi Smriti Library Gandhi Smriti Library 2026-06-16 450.00 H 891.43 SOB 181752 Books 450.00

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