Raag Darbari (Record no. 360197)
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| 003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER | |
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| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
| control field | 20260106163829.0 |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9788119899081 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | H TIW V |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | Tiwari, Vinod |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Raag Darbari |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | Noida |
| Name of publisher | Setu Prakashan |
| Year of publication | 2024 |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 336 p. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | 'राग दरबारी' हिन्दी के कालजयी उपन्यासों में शुमार है। इसके बहुतेरे संस्करण निकल चुके हैं; जहाँ बहुत सारी भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है वहीं इसे नाट्य मंचन और टीवी धारावाहिक जैसे अन्य माध्यमों में भी प्रस्तुत किया गया है। यह सब इसकी बेमिसाल लोकप्रियता का ही प्रमाण है। लेकिन 1968 में जब इसका पहला संस्करण निकला था तब हिन्दी के अनेक दिग्गजों की प्रतिक्रिया क़तई प्रशंसात्मक नहीं थी। बाद में भी उपन्यास में वर्णित यथार्थ की प्रामाणिकता और अन्तर्वस्तु से लेखक के ट्रीटमेंट आदि को लेकर सवाल उठते रहे। लेकिन आज़ादी के कुछ बरसों बाद राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, न्याय व्यवस्था यानी हर क्षेत्र में पसर रहे पाखण्ड और पतन के व्यंग्यात्मक चित्रण से भरपूर 'राग दरबारी' की लोकप्रियता बढ़ती गयी। यही नहीं, इसने एक तरह से लेखक की अन्य रचनाओं को ढक सा लिया। श्रीलाल शुक्ल की पहचान मुख्य रूप से 'राग दरबारी' के लेखक की बन गयी। इस कृति ने जहाँ उन्हें हिन्दी के चोटी के उपन्यासकारों की पाँत में ला बिठाया, वहीं इसने उन्हें व्यंग्यकार के रूप में भी स्थापित किया। दरअसल, यह हिन्दी में अपने ढंग की एक अपूर्व कृति थी जो विधागत ढर्रे से काफी अलग दीख रही थी, और शायद यही वजह रही होगी कि इसने अपनी बाबत हिन्दी समालोचना को असहज कर दिया; यह भी कह सकते हैं कि उसके सामने पुनर्पाठ और पुनर्विचार की चुनौती पेश की। प्रस्तुत पुस्तक ऐसी ही सामग्री का संकलन है जिसमें 'राग दरबारी' पर शुरुआती टिप्पणियों से लेकर बाद में, अलग-अलग दौर में, महत्त्वपूर्ण आलोचकों-लेखकों द्वारा लिखे गये आलेख शामिल हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि भिन्न-भिन्न नजर से एक अनन्य कृति के पाठ-पुनर्पाठ, पड़ताल और परख, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन को एकत्र प्रस्तुत करने की पहल का स्वागत होगा। |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Upanyas |
| -- | Aalochana |
| 9 (RLIN) | 16905 |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Koha item type | Books |
| Lost status | Home library | Current library | Date acquired | Cost, normal purchase price | Full call number | Accession Number | Koha item type | Public Note |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Gandhi Smriti Library | Gandhi Smriti Library | 2026-01-06 | 280.00 | H TIW V | 181395 | Books | 280.00 |
