Bhasha Ki Sanjeevani (Record no. 359977)
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| 003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER | |
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| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
| control field | 20251203143247.0 |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9789360862480 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | H KUM K |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | Kumar, Krishna |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Bhasha Ki Sanjeevani |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | New Delhi |
| Name of publisher | Rajkamal Prakashan |
| Year of publication | 2025 |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 167 p. |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | कृष्ण कुमार अपने पाठकों को पहचानते हैं और उनसे आत्मीयता बढ़ाने के अन्दाज़ में लिखते हैं। पहली बार उनका गद्य पढ़ रहे नए पाठक इस आत्मीयता का स्पर्श पाकर चकित होते हैं। निबन्ध की विधा कृष्ण कुमार को विशेष प्रिय रही है यद्यपि वे कहानी और संस्मरण भी चाव से लिखते रहे हैं। ‘भाषा की संजीवनी’ की शुरुआत थोड़ा-बहुत भी बता पाने के संघर्ष और सुकून से होती है और अन्त भाषा के जीवनदायी चरित्र के अभिन्दन से। इन दो विचार-ध्रुवों के बीच इस संग्रह में अठ्ठारह निबन्ध, समीक्षा-लेख और संस्मरण शामिल हैं। विषयों की विविधता के बीच पाठकों को कृष्ण कुमार के स्थायी सरोकार मिलेंगे—प्रकृति, स्त्री, सरकार और पढ़ाई। इन सभी के भीतर और इर्द-गिर्द मची भगदड़ और हिंसा पर टिप्पणी भी मिलेगी। इस निबन्ध विविधा से गुज़रते हुए पाठक याद करेंगे कि कृष्ण कुमार के लिए अगर कोई चीज़ नागवार है तो वह ‘विचार का डर’ है जो उनके एक प्रसिद्ध संग्रह का शीर्षक भी है। |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Nibandh Hindi |
| 9 (RLIN) | 16382 |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Koha item type | Books |
| Lost status | Home library | Current library | Date acquired | Cost, normal purchase price | Full call number | Accession Number | Koha item type | Public Note |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Gandhi Smriti Library | Gandhi Smriti Library | 2025-12-03 | 595.00 | H KUM K | 181194 | Books | 595.00 |
