Cheekh
Rahamani, Sabiha
Cheekh - New Delhi Little Bird 2025 - 143p.
समय के साथ कथा साहित्य में भी तेजी से परिवर्तन हुआ है। ऐसे में समाज में जो घट रहा है, जो हो रहा है, उसे कथा साहित्य में डाल देना सबीहा रहमानी की विशेषता है। लेखिका एक सधी हुई और अनुभवी तथा लोकप्रिय रचनाकार हैं, उच्च प्रशिक्षित शिक्षक और समाजसेवी हैं। इनके पास लोक चेतना का आग्रह है जो इन लघुकथाओं के विषय और शीर्षक में देखा जा सकता है। और जो यह भी सुनिश्चित करता है कि इन कथाओं को लिखते हुए उनपर बुद्धि की अपेक्षा मन अधिक हावी रहा। यही कारण है कि इन कथाओं में रागात्मकता प्रारंभ से अंत तक बनी हुई है। अपनी लघुकथाओं में इन्होंने समाज के महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ी दास्तान को केन्द्रित किया है। ऐसी दास्तां जिसमें कटुता, कठोरता, लालच है तो इंसानियत, जिंदगी, मुहब्बत, संवेदना और जजबातों की मिठास भी है। लघुकथाएँ भले ही छोटे प्रसंगों पर होती हैं पर 'सरसैया के दोहरे, ज्यों नाविक के तीर देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर' की तरह बड़ी सीख दे जाती हैं। इसीलिए इनका गद्य साहित्य में बेहद प्रभावाशाली स्थान है। 'चीख' संग्रह की लघुकथाएँ वर्तमान समय का आईना हैं। इनमें किसी न किसी सत्य का, विचार का और भावनाओं की तरलता का प्रवाह है साथ ही अन्वेषण भी। इन्हें पढ़ते हुए लगता है कि जैसे कथाओं के हर पात्र की संवेदना में सबीहा रहमानी पहले स्वयं को रचा-बसाकर उसे महसूस करती हैं तब उसे शब्दों का कलेवर पहनाती हैं। 'कुलदीप्ती' में एक बेटी कैसे चुपचाप अकेली माँ की जिम्मेदारी लेती है या 'साँपों को दूध' में एक ऐसी पत्नी की कथा है जिसका पति वर्षों से दूर है पर वह अपने ससुराल का रिश्ता लोकलाज के कारण निभाती रहती है। और तो और ससुराल में संबंध बने रहें इसलिए अपने देवर के उधार माँगने पर उसकी आर्थिक मदद भी करती है। पर वही देवर उस उधार को कभी नहीं लौटाता। ऐसे न जाने कितने विभिन्न प्रसंगों से संदर्भित और संग्रहित यह लघु कथाएँ जैसे 'चवन्नी चोर', 'तकिया कलाम' आदि हैं जिसे हम अपने आसपास घटित होते हुए हमेशा देखते हैं।
9789363069015
Hindi Story Collection
H RAH S
Cheekh - New Delhi Little Bird 2025 - 143p.
समय के साथ कथा साहित्य में भी तेजी से परिवर्तन हुआ है। ऐसे में समाज में जो घट रहा है, जो हो रहा है, उसे कथा साहित्य में डाल देना सबीहा रहमानी की विशेषता है। लेखिका एक सधी हुई और अनुभवी तथा लोकप्रिय रचनाकार हैं, उच्च प्रशिक्षित शिक्षक और समाजसेवी हैं। इनके पास लोक चेतना का आग्रह है जो इन लघुकथाओं के विषय और शीर्षक में देखा जा सकता है। और जो यह भी सुनिश्चित करता है कि इन कथाओं को लिखते हुए उनपर बुद्धि की अपेक्षा मन अधिक हावी रहा। यही कारण है कि इन कथाओं में रागात्मकता प्रारंभ से अंत तक बनी हुई है। अपनी लघुकथाओं में इन्होंने समाज के महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ी दास्तान को केन्द्रित किया है। ऐसी दास्तां जिसमें कटुता, कठोरता, लालच है तो इंसानियत, जिंदगी, मुहब्बत, संवेदना और जजबातों की मिठास भी है। लघुकथाएँ भले ही छोटे प्रसंगों पर होती हैं पर 'सरसैया के दोहरे, ज्यों नाविक के तीर देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर' की तरह बड़ी सीख दे जाती हैं। इसीलिए इनका गद्य साहित्य में बेहद प्रभावाशाली स्थान है। 'चीख' संग्रह की लघुकथाएँ वर्तमान समय का आईना हैं। इनमें किसी न किसी सत्य का, विचार का और भावनाओं की तरलता का प्रवाह है साथ ही अन्वेषण भी। इन्हें पढ़ते हुए लगता है कि जैसे कथाओं के हर पात्र की संवेदना में सबीहा रहमानी पहले स्वयं को रचा-बसाकर उसे महसूस करती हैं तब उसे शब्दों का कलेवर पहनाती हैं। 'कुलदीप्ती' में एक बेटी कैसे चुपचाप अकेली माँ की जिम्मेदारी लेती है या 'साँपों को दूध' में एक ऐसी पत्नी की कथा है जिसका पति वर्षों से दूर है पर वह अपने ससुराल का रिश्ता लोकलाज के कारण निभाती रहती है। और तो और ससुराल में संबंध बने रहें इसलिए अपने देवर के उधार माँगने पर उसकी आर्थिक मदद भी करती है। पर वही देवर उस उधार को कभी नहीं लौटाता। ऐसे न जाने कितने विभिन्न प्रसंगों से संदर्भित और संग्रहित यह लघु कथाएँ जैसे 'चवन्नी चोर', 'तकिया कलाम' आदि हैं जिसे हम अपने आसपास घटित होते हुए हमेशा देखते हैं।
9789363069015
Hindi Story Collection
H RAH S
