Bharat gatha : kavita sangrah

Khanna, Raj

Bharat gatha : kavita sangrah - Bhopal Sarvatra 2026 - 89

ध्रुव तारा इस आसमान पर समाधि लगाए है श्रवण अपनी वेहंगी में मात-पिता उठाए है सिंहासन आसीन पादुका प्रेरणा स्रोत है भरत राम से लौट आने का कर रहे अनुरोध हैं मुरली से मन हरने वाला, सुनाता है भगवद् गीता दांडी के पथ चलने वाला, बन जाता है राष्ट्र-पिता देवाशीष से धन्य है, नीर यहाँ की नदियों का रिश्ता है नबियों का, संस्कृतियों से सदियों का पंचायतों का आसन है, प्रांतों का शासन है अशोक स्तंभ से सुसज्जित, संसद का सिंहासन है जन जननी को समर्पित, राष्ट्रीय गान और गीत हैं हिमाद्रि की अनुगूँज में, गोदावरी का संगीत है राष्ट्रीय समर स्मारक में सेना के वो नायक हैं जिन के बलिदान भारत निर्माण निर्णायक हैंI

9789355439505


Bharat Gatha
Kavita Sangrah

H 954 KHA

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